आचार्य चाणक्य की गणना विश्व के श्रेष्ठतम विद्वानों में की जाती है। उन्होंने चाणक्य नीति के माध्यम से अनगिनत युवाओं का मार्गदर्शन किया था।

व्यक्ति अगर चोरी, जुआ, अन्याय और धोखा देकर धन कमाता है तो वह धन भी शीघ्र नष्ट हो जाता है।

इसलिए व्यक्ति को कभी भी अन्याय या झूठ बोलकर धन अर्जित नहीं करना चाहिए। ऐसे धन को पाप की श्रेणी में रखा जाता है।

यह धन कुछ दिनों तक आपके लोभ को कम तो कर सकता है लेकिन उससे अधिक आपके लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है। इसलिए इस प्रकार के धन को अर्जित करने से बचना चाहिए।

उन्होंने बताया है कि निर्धनता, रोग, दुख, बंधन और बुरी आदतें यह सभी मनुष्य के कर्मों का ही फल होती हैं।

जो जैसा बीज बोता है उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। इसलिए व्यक्ति को सदैव अच्छे ही कर्म करने चाहिए।

आचार्य चाणक्य बता रहे हैं कि व्यक्ति को हमेशा दान-धर्म करना चाहिए और किसी व्यक्ति को दुख अथवा झूठ बोलने जैसी बुरी आदतों से बचना चाहिए।